loving poetry

Sunday, 20 May 2012

जीवन है हसीन फिर भी
मन उदास है

खुशियाँ सारी पास फिर क्या
ख़्वाब है

दिन रात की ये मस्ती कब तक
साथ देगी

क्या ज़िंदगी के मायनों को
तलाश देगी

अर्थहीन ज़िंदगी का फ़ायदा
ही क्या

पाषाण में,खुद में फिर फर्क
ही क्या

रोपो एक पौधा जिसे जीवन
दे सको तुम

खुशी है यही गर इसे समझ
सको तुम…

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