loving poetry

Sunday, 20 May 2012

फिर चाँद खिला,फिर रात थमी,

फिर दिल ने कहा,है तेरी कमी,

फिर यादो के झोके महक गये,

फिर पागल अरमान बहक गये,

फिर जन्नत सी लगती है ज़मीन,

फिर दिल ने कहा,है तेरी कमी,

फिर गुजरे लम्हो की बाते,

फिर जाग गयी सारी राते,

फिर ठहर गयी पलको मे नमी,

फिर दिल ने कहा,है तेरी कमी,है तेरी कमी

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