kavitaayan from loving indians
Premi Kavi ki Kavitaayen
loving poetry
Wednesday, 16 May 2012
होठों के मुस्कुराने से मैं हूँ या आँखों के भीग जाने से मैं हूँ कलियों के खिलने से मैं हूँ या फूलों के मुरझाने से मैं हूँ जो भी हूँ, जहाँ भी हूँ, जब भी हूँ, जैसे भी हूँ ................ एक तेर पास आने से मैं हूँ या एक तेरे दूर जाने से मैं हूँ
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